– शान्ता चौधरीआइके सन्दर्भमे महिला जनिजाइत पछे छै कहैले उचित नेहैतै । अपनासब आइतक बहुत महिला जनिजाइतके नाम सुइनसक्ने चियै । जेसब गाम, समाज या राष्ट्रके लागि साहसिक या अतुलनीय कामसब कैर सक्ने छै । महिलासब साहसीक सफल हैले सक्तै कहैवला बहुत उदाहरणसब प्रस्तुत कैर सक्ने छै । समाज रसेरसे चेतना या उन्नतिके सुमार्ग दिसा नमकल अवस्थामे आव बेटा या बेटीके भेदभाव कम भेल महसुस कैर सकैचियै । बेटा सरह बेटीयो के शिक्षादिक्षा दैले परतै कहैवला मान्यताके स्थान द्याल गेल्छै । फलतः आई पुरुष सरह बहुत महिलोसब शिक्षित भ्यागेल्छै । शिक्षित भ्याके महिलासब विविध क्षेत्र, निकाय, संघसंस्थामे अतुलनीय योगदान द्याल देख सुइन सकैचियै । यद्यपि थारु जातिके महिलासबके सन्दर्भमे वात करैतखिना यी सब बहुते पिछडल या दयनीय अवस्थामे देख सकैचियै । पुरुषसबके तुलनामे महिलासब हरेक क्षेत्रमे हरेक कार्यमे बहुते पछा परल छै । थारु समुदायके महिलासब बेसीसेबेसी अशिक्षिते रहल छै । शिक्षित भेलाहा कनिको महिला दिदीबहिनीयो सब पछेमे रहल स्पष्ट देख सकैचियै । थारु महिलासब पछा परैके कारण चेतनाके कमी या गरिबी चियै । चेतनाके कमी भेला कारण अखुनतक परिवारमे वेटा सरह बेटी पढैले नैपाबने छै । बेटा सरह बेटी स्वतन्त्र भ्याके चलैले नैपाबने छै । बेटा जखा बेटियो कुछो करतै कहैबला सोच परिवारसब दूर राखैछै । घर–दुवार भेलाहा बर एतैत बेटीके जल्दी विहा कैरदेती त एकटा बोझ बाटे मुक्त हेती कहैवला सोचके बेसी मान्यता द्याल गेलछै । और त और स्वयम् महिला दिदी बहिनीसब पढाईप्रति खासे चिन्तित भेलाहा नैदेखै चियै । सुविधाके बाबजुदो बहुतगोरा पढाईके बिचेमे छोडल भेट्वै । कुनो कुनो दिदीबहिनीसब घर, परिवार, समाजके डरके लाजसे, कुछो कैर नै सइक के पछा परल छै । त्यहीना बहुत जखा थारु जातिसब गरिबीके रेखा निचा रहल छै । यहा गरिबीके विविध समस्याके दुवारे उच्च शिक्षा पढैले असक्षम रहैछै । अन्ततः अशिक्षा और अज्ञानताके कारण बेटीके उच्च शिक्षामे पढाईके बदलामे जल्दीसे विहा कैरदैछै । कुनो ठाममे दिदीबहिनीसब छोट उमेरमे, करकापमे विवाह कैरके साँझ विहान भन्साके धुँवामे लोर पोछैछै और बच्चा जन्माइके मेशिन बनैले बाध्य छै । एक चिम्टी सिनुरसे बनाल विहा सम्बन्धके मर्यादा भित्तर अपनाके समाहित कैरके ‘घोघ प्रथा’मे थारु महिलासब जीवन विताइले बाध्य छै । अशिक्षाके अन्धकारमे रुढीवादी सोच भित्तर और गरिबीके समस्या बहुतसे बहुत थारु महिला दिदीबहिनीसब पढैके जोश जाँगर क्षमता रहैछै तबो चुपचाप बैठल रहैवला बाध्यता छै । कोइ कोइ येहेन महिला दिदीबहिनीसब छै जे अनेक किसिमके कठिनाइसब संगे संघर्ष करैत उच्च शिक्षा हासिल कैरतो ओकरसंगे भेलाहा खुबी, कला, प्रतिभा सबके देखाइके सुअवसर और उचित ठाम नैपावने छै । तवो दोसरकता विविध क्षेत्रमे लागैले प्रेरित हौसला, आँट भरोशा दैके बदलामे त बेटी जनिजाइत चि तुँ, करैले नैसक्भी तुँ, करैले नै हेतौ, जाइले नै हेतौ । यहिना परिवारके नकारात्मक और छोट सोचके महिलासब अगा बढैवला बाटसबमे अवरोध आनल गेलछै । तहिना सम्पन्न परिवारके कोही थारु महिला दिदीबहिनीसब विविध सुविधाके साथे शिक्षित भेट्तोमे खासे अगा बढल नैदेखबै । जाति भेद और लिंग भेदके कारण उ शिक्षाके विविध कार्यमे सदुपयोग करैले नै पावने छै । और जाइतके बहुल्यता रहल यी ठाममे थारु महिलेटा नै कि थारु जातिसब अवसर और स्थान पावैले नैसक्नेछै । कहाई और लेखाईमे आदिबासी जनजाति महिला, दलित, कुछो लिखल रहैछै । करैत खिना व्यवहारमे यी सब नैभेट्वै । चार जाइत छत्तीस वर्णके साझा फूलबारीके देश नेपाल, जत अनेक जाति, अनेक भाषा, अनेक धर्म भेलाहा आदमी सबके बसोबास रहल छै । सैब गोरामे समान व्यवहार, समान हक अधिकारके व्यवस्था कानून कैरतो अखुनतक यैठीना समानता हैले नैसकल छै । पीडित वर्ग पीडामे छै, पिछरल वर्ग समुदाय पछेमे छै, तैदुवारे सम्पूर्ण वर्ग समुदाय, जातिके समान व्यवहार, समान हक, अधिकार और अवसर द्याल खण्डमे हालके नामेटा नयाँ नेपाल वास्तवमे सुन्दर या सभ्य नयाँ नेपाल बनैके खातिर महत्वपूर्ण भूमिका खेलतियै । िबीएड तेस्रो वर्ष (गौरादह बहुमुखी क्याम्पस) गौरादह–७, हाँसखोरा