Saturday, July 25, 2009

पुरुब के समाद-१

सम्पादकीय
सूचना तथा संचारके युगमे थारु लगायत सम्पूर्ण आदिबासी जनजातिके साहित्यिक तथा राजनीतिक चेतनाके अगा बढाबइले हमसब कोशिश करने चियै । उदीयमान थारु समुदायके साहित्यिक लेखनशैलीके बृद्धि करैलेल राजनीतिक विचारके संचारित करैके वास्ते तयार करल यी प्रयास थारु विद्याथी समाज झापाके पहिलका दस्तावेज चियै । थारु समुदायके आवाज थारु भाषामे उतारैके साथे गैरथारु समुदायके आवाजोके समटल छै । एकटा हारीमे सैब किसिमके फूलसब गाथैले पावे परतै कहैके हम्रोके मान्यता चियै । आवके नयाँ नेपालमे यी सैब फूलसब के हक, अधिकार सुनिश्चित हैले परतै । राज्यके रुपान्तरण के कोण दिसा अगा बढैके विकल्प नैरहल वर्तमान अवस्थामे यी पत्रिका महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करतै कहैके विश्वास हमसब लेने चियै । कहलजाइछै कलमसे विचार, विचारसे क्रान्ति और क्रान्तिसे शान्ति आवैछै लावैछे । लवका गाछके फस्टावैले मलजल करैवला, बढाइवला जिम्मा आफ्नोके सैब गोराके चियै । पहिलका प्रयासके प्रतिक्रियाके लागि हम्रोके मूल केवार खुला रहतै । यी पत्रिका निरन्तरताके कडी पाठक वर्गके सल्लाह–सुझाव चियै । अन्तमे, थारुके नयाँ वर्ष माघी संक्राइतके सैब गोराके शुभकामना ! सैब जातजाति एके छाइनके निचा रहैले पावैले परतै । छाइन सबै गोराके चियै ।

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