Saturday, July 25, 2009

थारू के निम्ति थारू

विशालकाय डाइनासोरके अस्तित्व नैरहैके मूल कारण समय अनुसार चलैले नै सकैले चियै । हरेक जातजातिसब आपन जातीय अस्तित्व बचाइले समय अनुसार चलैले परतै कहैके पाठ डाइनोसर सिकाइने छै । आपन जातीय अस्तित्व बचाइले वहा जातिके भूमिका अग्रणी रहैछै, त्यइनङ, थारु जातिके अस्तित्व जीवित राखैके खातिर थारु जातिके भूमिका महत्वपूर्ण रहैछै । यहा समयके मागके आत्मसात करैत थारु जातिके विकास तथा उत्थानके निमित्त सनेश स्वरुप त्रैमासिक पत्रिका ‘पुरुवके समाद्’ पहुचाइले कोशिश करैचेै । नेपालके तराई क्षेत्रमे पुरुव मेचीसे पश्चिम महाकालीतक ३० लाखसे वेशी जनसंख्या रहल थारुसब पछा परल एक मात्र कारण चेतनाके अभाव चियै कहैत खिना फरक नैपरतै । यी पत्रिका थारु लगायत और आदिबासी जनजातिके राजनीतिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा शैक्षिक चेतनाके स्तर बृद्धि करातै कहैके विश्वास हमसब लेने चियै । चेतनाके अभावमे कुनो जाइत आपन भाषा, भेषभूषा, रीतिरिवाज, पावैन तथा रहनसहन बचाइके खातिर सम्बन्धित जाइतके अग्रसरता रहैले परतै कहैके वात अपनासबके अगामे नैछिपल छै । दोसर जनान्दोलन २०६२÷०६३ मे बलिदान दैवला सम्पूर्ण शहीदसबप्रति हमसब अन्तर हृदयसे श्रद्धासुमन व्यक्त करैचियै । शहीदसबके लहु आइका नयाँ नेपालके निर्माण संविधानसभाके निर्वाचनमार्फत चैत २८ गते हैवला छै । बहुलभाषा, बहुलजाति रहल नेपालमे सैब जातिके हक तथा अधिकार सुनिश्चित हैले परतै । ओइसबके माग तथा मुद्दाके सुनुवाई हैले परतै तवेटा सुन्दर शान्त नेपालके निर्माण हैले सकतै । अन्तमे, झापाके सम्पूर्ण थारु जातिके धन्यवाद छै, जेसब हम्रोके पत्रिका प्रकाशन के निम्ति चन्दा सहयोग उपलब्ध कराने छै, थारु कल्याणकारिणी सभा, लोकतान्त्रिक थारु संघ, जे हम्रोके हरपल पेरा देखाइते अभिभावकत्व निर्वाह करलकै । सम्पूर्ण थारु विद्यार्थीसब जे पत्रिका प्रकाशनके लेल हर कदममे निर्णायक टाङ अगा बढालकै, और आदिबासी जनजातिके जातीय संघ संगठनसब जे हम्रोके साथ सहयोग करलक, सम्पूर्णप्रति थारु विद्यार्थी समाज सदासर्वदा ऋणी रहतै ।

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