Saturday, July 25, 2009

प्रेमजाल – कथा

– सियाराम चौधरी
प्रेम एकटा अदृश्य जाल चियै । यी जालमे जबकोइ छौराछौरी बीच प्रेम हैछै । उसब कथियो नै जानै छै कि ओक्रोके कथि हेतै । जब कोइ उसब बीच प्रेम है छै । उसब असल असल सपना देखैछै, जीवनमे । प्रेम करैवला छौराछौरीके राइतमे नीन नै लागैछै । उसबके दिनमे भुखो नै लागैछै । प्रेम एकटा एहन छाया चियैकी यी कुनो जाइत, धरम, गरीब, गौर यीसब कुछो नै जानैछै । मात्र ओक्रोके एकटा असल सम्बन्ध दैले खोजैछै, उसब असल जीवन निर्वाह करैले विवाहके निर्णयमे पुगैछै । मगर उसबके जाइत फरक फरक हैछै । उ छौराछौरीके घरमे ओकर बाप मैयासंगे हाथ मांगैले जाइछै । लेकिन छौरीके वाप–मैया मन्जुर नै करैछै । वोहैसे छौरा या छौरी दुनुगोरा भाइगके विहा करैछै । यी फैसलासे छौरातरफ और छौरीतरफ दुनु तरफके वापमैयाके नै असल लाइगके उ बखत घरमे आवैले नै दैछै । उसब बहारेमे आपनेसे कमाके जीवन निर्वाह करैलै थालै छै । दुई तीन सालवाद छौराके र छौरीके वाप मैया उसबके आने जाइछै की आपने बेटाबेटी चियै । कुनो पनि मैया–वाप आपन बेटाबेटीके असल जीवनके लागि सोचैछै । जे कोई प्रेम करैछै ओक्रोरके छुटाइके काम नै करु । कजे कोई प्रेमी और प्रेमिकाके छुटाइछै । उसबके जीवनसे सुख कहियो ने है छै । उसब के छुटाइनासे आक्रोके आत्महत्या करेलै विवश है छै । हमर कहाई अनुसार प्रेमी और प्रेमिकाके बीचमे मन मिलल रहैछै । उसब विहा करैले खोजैछै त वोईमे असल हेतै । यैमे छौरा न छौरी कक्रो घरमे बदनाम नै हेतौ भाइगके जेतौ त दुनु घरमे बदनाम हेतौ । वोहैसे उसब बीचमे मन मिलल हैछै, उसबके पाछे जीवनमे कुनो बाधा नै हेतै एकटा असल फूल जखा परिवार बन्तै । आखिर खुन सबकोइक एकटा चियै ।
गरामनी–२, बाह्रघरे

आइका जनिजाइत

– शान्ता चौधरी
आइके सन्दर्भमे महिला जनिजाइत पछे छै कहैले उचित नेहैतै । अपनासब आइतक बहुत महिला जनिजाइतके नाम सुइनसक्ने चियै । जेसब गाम, समाज या राष्ट्रके लागि साहसिक या अतुलनीय कामसब कैर सक्ने छै । महिलासब साहसीक सफल हैले सक्तै कहैवला बहुत उदाहरणसब प्रस्तुत कैर सक्ने छै । समाज रसेरसे चेतना या उन्नतिके सुमार्ग दिसा नमकल अवस्थामे आव बेटा या बेटीके भेदभाव कम भेल महसुस कैर सकैचियै । बेटा सरह बेटीयो के शिक्षादिक्षा दैले परतै कहैवला मान्यताके स्थान द्याल गेल्छै । फलतः आई पुरुष सरह बहुत महिलोसब शिक्षित भ्यागेल्छै । शिक्षित भ्याके महिलासब विविध क्षेत्र, निकाय, संघसंस्थामे अतुलनीय योगदान द्याल देख सुइन सकैचियै । यद्यपि थारु जातिके महिलासबके सन्दर्भमे वात करैतखिना यी सब बहुते पिछडल या दयनीय अवस्थामे देख सकैचियै । पुरुषसबके तुलनामे महिलासब हरेक क्षेत्रमे हरेक कार्यमे बहुते पछा परल छै । थारु समुदायके महिलासब बेसीसेबेसी अशिक्षिते रहल छै । शिक्षित भेलाहा कनिको महिला दिदीबहिनीयो सब पछेमे रहल स्पष्ट देख सकैचियै । थारु महिलासब पछा परैके कारण चेतनाके कमी या गरिबी चियै । चेतनाके कमी भेला कारण अखुनतक परिवारमे वेटा सरह बेटी पढैले नैपाबने छै । बेटा सरह बेटी स्वतन्त्र भ्याके चलैले नैपाबने छै । बेटा जखा बेटियो कुछो करतै कहैबला सोच परिवारसब दूर राखैछै । घर–दुवार भेलाहा बर एतैत बेटीके जल्दी विहा कैरदेती त एकटा बोझ बाटे मुक्त हेती कहैवला सोचके बेसी मान्यता द्याल गेलछै । और त और स्वयम् महिला दिदी बहिनीसब पढाईप्रति खासे चिन्तित भेलाहा नैदेखै चियै । सुविधाके बाबजुदो बहुतगोरा पढाईके बिचेमे छोडल भेट्वै । कुनो कुनो दिदीबहिनीसब घर, परिवार, समाजके डरके लाजसे, कुछो कैर नै सइक के पछा परल छै । त्यहीना बहुत जखा थारु जातिसब गरिबीके रेखा निचा रहल छै । यहा गरिबीके विविध समस्याके दुवारे उच्च शिक्षा पढैले असक्षम रहैछै । अन्ततः अशिक्षा और अज्ञानताके कारण बेटीके उच्च शिक्षामे पढाईके बदलामे जल्दीसे विहा कैरदैछै । कुनो ठाममे दिदीबहिनीसब छोट उमेरमे, करकापमे विवाह कैरके साँझ विहान भन्साके धुँवामे लोर पोछैछै और बच्चा जन्माइके मेशिन बनैले बाध्य छै । एक चिम्टी सिनुरसे बनाल विहा सम्बन्धके मर्यादा भित्तर अपनाके समाहित कैरके ‘घोघ प्रथा’मे थारु महिलासब जीवन विताइले बाध्य छै । अशिक्षाके अन्धकारमे रुढीवादी सोच भित्तर और गरिबीके समस्या बहुतसे बहुत थारु महिला दिदीबहिनीसब पढैके जोश जाँगर क्षमता रहैछै तबो चुपचाप बैठल रहैवला बाध्यता छै । कोइ कोइ येहेन महिला दिदीबहिनीसब छै जे अनेक किसिमके कठिनाइसब संगे संघर्ष करैत उच्च शिक्षा हासिल कैरतो ओकरसंगे भेलाहा खुबी, कला, प्रतिभा सबके देखाइके सुअवसर और उचित ठाम नैपावने छै । तवो दोसरकता विविध क्षेत्रमे लागैले प्रेरित हौसला, आँट भरोशा दैके बदलामे त बेटी जनिजाइत चि तुँ, करैले नैसक्भी तुँ, करैले नै हेतौ, जाइले नै हेतौ । यहिना परिवारके नकारात्मक और छोट सोचके महिलासब अगा बढैवला बाटसबमे अवरोध आनल गेलछै । तहिना सम्पन्न परिवारके कोही थारु महिला दिदीबहिनीसब विविध सुविधाके साथे शिक्षित भेट्तोमे खासे अगा बढल नैदेखबै । जाति भेद और लिंग भेदके कारण उ शिक्षाके विविध कार्यमे सदुपयोग करैले नै पावने छै । और जाइतके बहुल्यता रहल यी ठाममे थारु महिलेटा नै कि थारु जातिसब अवसर और स्थान पावैले नैसक्नेछै । कहाई और लेखाईमे आदिबासी जनजाति महिला, दलित, कुछो लिखल रहैछै । करैत खिना व्यवहारमे यी सब नैभेट्वै । चार जाइत छत्तीस वर्णके साझा फूलबारीके देश नेपाल, जत अनेक जाति, अनेक भाषा, अनेक धर्म भेलाहा आदमी सबके बसोबास रहल छै । सैब गोरामे समान व्यवहार, समान हक अधिकारके व्यवस्था कानून कैरतो अखुनतक यैठीना समानता हैले नैसकल छै । पीडित वर्ग पीडामे छै, पिछरल वर्ग समुदाय पछेमे छै, तैदुवारे सम्पूर्ण वर्ग समुदाय, जातिके समान व्यवहार, समान हक, अधिकार और अवसर द्याल खण्डमे हालके नामेटा नयाँ नेपाल वास्तवमे सुन्दर या सभ्य नयाँ नेपाल बनैके खातिर महत्वपूर्ण भूमिका खेलतियै । िबीएड तेस्रो वर्ष (गौरादह बहुमुखी क्याम्पस) गौरादह–७, हाँसखोरा

संदेश



- सलूजा चौधरी
आत्मीय साथी प्रमिला अटुट सम्झनाका सौगातहरु अनायासै तिम्रो सम्झनाले आज विगाताका पलहरुलाई सम्झिन बाध्य तुल्यायो । स्कूले जीवनका ती दिनहरु सम्झिँदा आज पनि मेरो आँखाबाट अनायासै आँशुका ढिकाहरु टलपल टलपल गर्दछन् अनि क्षितिजमा तिम्रो अनुहार झिलिमिली देख्छु । जीवन यात्राको क्रममा आज हामी दोबाटोमा हिँड्न बाध्य भयौं । थाहा छैन तिमी कुन मोडमा छौ ? कहाँ छौ ? के गर्दैछौ ? आज म जीवनको धेरथोर सुखदुःखमा छु । मेरो जीवनको सुख दुःख या जुनसुकै पाटोमा पनि म हरपल तिमीलाई नै सम्झिरहन्छ । किनकि तिमीले मलाई मेरो सुखमा भन्दा बढी दुःखमा साथ दिएकी थियौ तर आज तिमी कहाँ छौ ? जहाँ भए पनि तिम्रो जीवन सदा–सदा फूल झै फक्रिरहोस् । प्रमिला हाम्रो भेट नभएको पनि आठ वर्ष भइसक्यो ? यो संसार सोचेको भन्दा पनि ठूलो छ । त्यसैले जीवन यात्राको क्रममा तिमीसंग अवश्य पनि भेट हुनेछ भन्ने आशा लिई यो मन हिँडिरहेको छ, पाइलाहरु निरन्तर अगाडि बढिरहेको छ । तिमीसंग पुनरमिलनको आशमा जीवन विताउने ।
गरामनी–१, झापा

थारू के निम्ति थारू

विशालकाय डाइनासोरके अस्तित्व नैरहैके मूल कारण समय अनुसार चलैले नै सकैले चियै । हरेक जातजातिसब आपन जातीय अस्तित्व बचाइले समय अनुसार चलैले परतै कहैके पाठ डाइनोसर सिकाइने छै । आपन जातीय अस्तित्व बचाइले वहा जातिके भूमिका अग्रणी रहैछै, त्यइनङ, थारु जातिके अस्तित्व जीवित राखैके खातिर थारु जातिके भूमिका महत्वपूर्ण रहैछै । यहा समयके मागके आत्मसात करैत थारु जातिके विकास तथा उत्थानके निमित्त सनेश स्वरुप त्रैमासिक पत्रिका ‘पुरुवके समाद्’ पहुचाइले कोशिश करैचेै । नेपालके तराई क्षेत्रमे पुरुव मेचीसे पश्चिम महाकालीतक ३० लाखसे वेशी जनसंख्या रहल थारुसब पछा परल एक मात्र कारण चेतनाके अभाव चियै कहैत खिना फरक नैपरतै । यी पत्रिका थारु लगायत और आदिबासी जनजातिके राजनीतिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा शैक्षिक चेतनाके स्तर बृद्धि करातै कहैके विश्वास हमसब लेने चियै । चेतनाके अभावमे कुनो जाइत आपन भाषा, भेषभूषा, रीतिरिवाज, पावैन तथा रहनसहन बचाइके खातिर सम्बन्धित जाइतके अग्रसरता रहैले परतै कहैके वात अपनासबके अगामे नैछिपल छै । दोसर जनान्दोलन २०६२÷०६३ मे बलिदान दैवला सम्पूर्ण शहीदसबप्रति हमसब अन्तर हृदयसे श्रद्धासुमन व्यक्त करैचियै । शहीदसबके लहु आइका नयाँ नेपालके निर्माण संविधानसभाके निर्वाचनमार्फत चैत २८ गते हैवला छै । बहुलभाषा, बहुलजाति रहल नेपालमे सैब जातिके हक तथा अधिकार सुनिश्चित हैले परतै । ओइसबके माग तथा मुद्दाके सुनुवाई हैले परतै तवेटा सुन्दर शान्त नेपालके निर्माण हैले सकतै । अन्तमे, झापाके सम्पूर्ण थारु जातिके धन्यवाद छै, जेसब हम्रोके पत्रिका प्रकाशन के निम्ति चन्दा सहयोग उपलब्ध कराने छै, थारु कल्याणकारिणी सभा, लोकतान्त्रिक थारु संघ, जे हम्रोके हरपल पेरा देखाइते अभिभावकत्व निर्वाह करलकै । सम्पूर्ण थारु विद्यार्थीसब जे पत्रिका प्रकाशनके लेल हर कदममे निर्णायक टाङ अगा बढालकै, और आदिबासी जनजातिके जातीय संघ संगठनसब जे हम्रोके साथ सहयोग करलक, सम्पूर्णप्रति थारु विद्यार्थी समाज सदासर्वदा ऋणी रहतै ।

पुरुब के समाद-१

सम्पादकीय
सूचना तथा संचारके युगमे थारु लगायत सम्पूर्ण आदिबासी जनजातिके साहित्यिक तथा राजनीतिक चेतनाके अगा बढाबइले हमसब कोशिश करने चियै । उदीयमान थारु समुदायके साहित्यिक लेखनशैलीके बृद्धि करैलेल राजनीतिक विचारके संचारित करैके वास्ते तयार करल यी प्रयास थारु विद्याथी समाज झापाके पहिलका दस्तावेज चियै । थारु समुदायके आवाज थारु भाषामे उतारैके साथे गैरथारु समुदायके आवाजोके समटल छै । एकटा हारीमे सैब किसिमके फूलसब गाथैले पावे परतै कहैके हम्रोके मान्यता चियै । आवके नयाँ नेपालमे यी सैब फूलसब के हक, अधिकार सुनिश्चित हैले परतै । राज्यके रुपान्तरण के कोण दिसा अगा बढैके विकल्प नैरहल वर्तमान अवस्थामे यी पत्रिका महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करतै कहैके विश्वास हमसब लेने चियै । कहलजाइछै कलमसे विचार, विचारसे क्रान्ति और क्रान्तिसे शान्ति आवैछै लावैछे । लवका गाछके फस्टावैले मलजल करैवला, बढाइवला जिम्मा आफ्नोके सैब गोराके चियै । पहिलका प्रयासके प्रतिक्रियाके लागि हम्रोके मूल केवार खुला रहतै । यी पत्रिका निरन्तरताके कडी पाठक वर्गके सल्लाह–सुझाव चियै । अन्तमे, थारुके नयाँ वर्ष माघी संक्राइतके सैब गोराके शुभकामना ! सैब जातजाति एके छाइनके निचा रहैले पावैले परतै । छाइन सबै गोराके चियै ।